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हिंदू धर्म में हर देवी-देवताओं के लिए एक अलग से ही स्थान दिया गया है।

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Published: 03 Oct 2017 › Updated: 03 Oct 2017हिंदू धर्म में हर देवी-देवताओं के लिए एक अलग से ही स्थान दिया गया है।

हिंदू धर्म में हर देवी-देवताओं के लिए एक अलग से ही स्थान दिया गया है।

हिंदू धर्म में हर देवी-देवताओं के लिए एक अलग से ही स्थान दिया गया है। IMG-20171003-WA0034.jpgहिंदू धर्म में जैसे-जैसे देवी-देवताओं में स्थान बता रखें हैं वैसे लोगों ने भी अपने घरों में वैसे ही देवी-देवताओं को स्थापित किया हुआ है। आप सबके घरों में ही एक अलग से पूजा घर तो जरूर होगा। और यह पूजा घर सबकेही घरों में होता है और इस बात के बारे में हिंदू धर्म में बताया हुआ है। हर घर में मंदिर हर तरह के होते हैं। कुछ घरों में मंदिर तो छोटे-छोटे होते हैं।

कई बार ऐसा देखा गया है कि हम लोगों को पूरी तरह से जानकारी नहीं होने के कारण हम ऐसी कई गलतियां कर जाते हैं जिनकी वजह से अशुभ माना जाता है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर का मेन गेट, कमरे, किचन, सीढिय़ां और घर का मंदिर यह सब वास्तु दोष से मुक्त होने चाहिए। घर के सारे के सारे स्थान महत्वपूर्ण होते हैं। यह कहा जाता है कि घर में मंदिर वाला स्थान सबसे शुभ होता है और इसलिए यह कहा जाता है कि मंदिर बनाते समय वास्तु दोष हो तो उसे हटा लें।

मंदिर और वास्तु शास्त्र के नियम

घर में जब भी मंदिर स्थापित होता है तो उसके भी नियम होते हैं और उनका पालन जरूर करना चाहिए। अगर आप अपने घर में ऐसे ही बिना देखे मंदिर बना लेते हैं तो उसका फल आपको प्राप्त बिल्कुल भी नहीं होता है। घर में मंदिर का स्थान बहुत ही महत्व रखता है। मंदिर का स्थान ही महत्व नहीं रखता है बल्कि दिशा और मंदिर में कौन-कौन सी चीजें रखनी चाहिए इसका भी अपना ही महत्व होता है। आपने मंदिर की स्थापना सही जगह पर कर दी तो आपका काम वहीं खत्म नहीं होता है।

इसमें ऐसे काफी सारे नियम हैं जिनके बारे में हर व्यक्ति को पता होना चाहिए। आपको अपने घर के मंदिर को हमेशा ही साफ रखना चाहिए और कभी भी मंदिर पर धूल-मिट्टी या फिर गंदगी नहीं आनी चाहिए। मंदिर में कभी भी अंधेरा नहीं होना चाहिए। मंदिर में हमेशा रोशनी होनी चाहिए क्योंकि मंदिर में अंधेरा अशुभ माना जाता है। मंदिर में किसी भी तरह की कोर्ई भी खंडित मूर्ति नहीं रखनी चाहिए। मूर्तियों को लेकर भी कई तरह की बातें हैं जिनका खास ध्यान रखना होता है। अब हम आपको बताएंगे कि कौन-कौन सी मूर्ति आपको अपने पूजा घर में नहीं रखनी चाहिए।

भैरव देव

भगवान शिव का ही भैरव देव एक अवतार हैं। भैरव देव की मूर्ति को कभी भी अपने घर के पूजा घर में नहीं रखना चाहिए। इसलिए ऐसा बोला जाता है क्योंकि भैरव देव तंत्र विधा के देवता माने जाते हैं। भैरव देव की पूजा घर के अंदर नहीं बाहर करनी चाहिए।

नटराज

आप में से कई लोग होंगे जो नटराज की मूर्ती को अपने घर के मंदिर में रखते होंगे। नटराज की मूर्ति देखने में काफी सुंदर लगती है। नटराज की मूर्ति को कभी भी भूलकर पूजा घर में नहीं रखना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि नटराज भगवान शिव का रूद्र रूप होता है मतलब भगवान शिव की क्रोधित अवस्थाएं होती हैं। इसलिए कहते हैं कि नटराज की मूर्ति को पूजा घर में रखने से घर में अशांति आती है।

शनि देव

सूर्य पुत्र शनि देव की मूर्ति को भी पूजा घर में नहीं रखना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि शनि देव की पूजा बाहर के मंदिरों में ही करनी चाहिए। अपने घर के पूजा घर में शनि देव की मूर्र्ति को स्थापित न करें।

राहु-केतु

घर में राहु-केतु की मूर्ति को भी रखना अशुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के माने तो शनि, राहु और केतु को पापी ग्रह माना गया है। आप इनकी पूजा करते हैं अपने घर में तो आपके घर में शांति आती है। कष्ट भी दूर हो जाते हैं। लेकिन आपको एक बात का ध्यान रखना होगा कि पूजा घर के बाहर ही करें। घर के अंदर नहीं करनी हैं इनकी पूजा।

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