Samadhi Om avatar

Poem in Hindi

heartbitt

Published: 21 Apr 2018 › Updated: 21 Apr 2018Poem in Hindi

Poem in Hindi

दर्द कागज़ पर,
मेरा बिकता रहा,

मैं बैचैन था,
रातभर लिखता रहा..

छू रहे थे सब,
बुलंदियाँ आसमान की,

मैं सितारों के बीच,
चाँद की तरह छिपता रहा..

अकड होती तो,
कब का टूट गया होता,

मैं था नाज़ुक डाली,
जो सबके आगे झुकता रहा..

बदले यहाँ लोगों ने,
रंग अपने-अपने ढंग से,

रंग मेरा भी निखरा पर,
मैं मेहँदी की तरह पीसता रहा..

जिनको जल्दी थी,
वो बढ़ चले मंज़िल की ओर,

मैं समन्दर से राज,
गहराई के सीखता रहा..!!

"ज़िन्दगी कभी भी ले सकती है करवट...
तू गुमान न कर...

बुलंदियाँ छू हज़ार, मगर...
उसके लिए कोई 'गुनाह' न कर.

कुछ बेतुके झगड़े,
कुछ इस तरह खत्म कर दिए मैंने

जहाँ गलती नही भी थी मेरी,
फिर भी हाथ जोड़ दिए मैंने

Leave Poem in Hindi to:

Written by

Read more #poem posts


Best Posts From Samadhi Om

We have not curated any of heartbitt's posts yet. But you can encourage our curation team to review posts by visiting them regularly and by referring other readers. Because we give priority to frequently read content.

More Posts From Samadhi Om