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*मुंशी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता*
🐋 ख्वाहिश नहीं मुझे _मशहूर होने की, _आप मुझे पहचानते हो_ _बस इतना ही काफी है._ अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे, _क्यों की जिसकी जितनी जरूरत थी_ _उसने उतना
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